भावों को शब्दों में अंकित करना और अपना नज़रिया दुनिया के सामने रखना.....अपने लेखन पर दुनिया की प्रतिक्रिया जानना......हाशिये की आवाज़ को केन्द्र में लाना और लोगों को जोड़ना.......आपका स्वागत है अनु की दुनिया में...... Copyright © अनीता लागुरी ( अनु ) All Rights Reserved. Strict No Copy Policy. For Permission contact.
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
दूर दूर तक
दूर-दूर तक धूल उड़ाती चौड़ी सपाट सड़के, शांत पड़ी रह गई, जब बारिश की बूंदों ने असमय ही उन्हें भींगो दिया.. यूं लगा उन्हें मानो धरा को भिं...
-
दूर-दूर तक धूल उड़ाती चौड़ी सपाट सड़के, शांत पड़ी रह गई, जब बारिश की बूंदों ने असमय ही उन्हें भींगो दिया.. यूं लगा उन्हें मानो धरा को भिं...
-
हाँ पहली बार देखा था सूरज को सिसकते हुए...!! दंभ से भरे लाल गोलाकार वृत्त में सालों से अकेले खड़े हुए..!! हमारे कोसे जाने की अवधि में ...
-
अधखुली खिड़की से, धुएं के बादल निकल आए, संग साथ में सोंधी रोटी की ख़ुशबू भी ले आए, सुलगती अंगीठी और अम्...

तन्हा कटते नहीं अब दिन...
जवाब देंहटाएंवाह अनिता जी
क्या बात है
प्यार सच में एक दूसरे पर आश्रित होता है।
.. धन्यवाद रोहितास जी,सही कहा आश्रित होते है तब ही वो एक दूजे के पूरक बन समपूर्ण हो पाते है🙏
जवाब देंहटाएंभावनाओं से भरी रचना किसी के लिए ख्वाब ,किसी के लिए हकीकत..
जवाब देंहटाएंभावों का सफर जारी रहे।
.. जी बहुत-बहुत धन्यवाद
हटाएंसारी बेचैनियों का एक जवाब हैं आपकी कविता।
जवाब देंहटाएंसादर
जी धन्यवाद जफर जी...💐💐
हटाएं.. जी बहुत-बहुत धन्यवाद निमंत्रण के लिए मैं जरूर आऊंगी
जवाब देंहटाएंवाह अनु जी संक्षेप में सरस शृंगार भाव ज्यों मन के एहसास।
जवाब देंहटाएंसुंदर बंध।